Friday, March 10, 2017

जन समस्या शक्ति केंन्द्र (Jan Samasya Shakti Kendra) एनजीओ नें किया अपना ब्लॉग लांच

जन समस्या शक्ति केंन्द्र (Jan Samasya Shakti Kendra)  एनजीओ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजकुमार चौबे नें एक मुलाकात के दौरान बताया कि वे एक अपना ब्लॉग लांच कर दिये हैं जिसका नाम http://jansamasyashaktikendra.blogspot.in/ है और वे इसके माध्यम से पूरे देश के युवाओं को जागरूक करेंगे व साथ में जन-जन की समस्याओं को पूरी तरह से दूर करने का प्रयास करेंगे, उन्होंने अपने एनजीओ के प्रमुख कार्य को इस प्रकार बताया: 

१.    सामान्य जनता और सरकार व अन्य सरकारी संस्थानों के बीच में एक अंतरफलक / कड़ी के रूप में कार्य करना ताकि सामान्य जनता की सामाजिक-आर्थिक विकास की चुनौतियों, समस्याओं और मुद्दों को सरकार और सरकारी तंत्र तक पंहुचाया जा सके और उसका प्राथमिकता पूर्वक समाधान हो सके |
२.    कौशल  संबर्धन :
युवावों के कौशल  संबर्धन के लिये प्रशिक्षण देना,  कौशल- अंतर अध्ययन करना, कौशल संबर्धन शिविर आयोजित करके कौशल के बिभिन्न आयामों की जानकारी देना, आर्थिक मदद करना, केंद्रीय एवं राज्य सरकारों और अन्य सरकारी संस्थानों जैसे कि कौशल  संबर्धन एवं उद्यमिता मंत्रालय, सेक्टर कौशल परिषदों, राष्ट्रीय कौशल  संबर्धन कार्पोरेशन , के साथ मिलकर देश में कौशल  का एक वातावरण  तैयार करना जिससे कि भारतीय युवा रोजगारपरक बन सके और जीवन यापन कर सकें |          
३.    अ). समाज में अपराधों की रोकथाम एवं अपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार  के लिए सरकारी  तंत्र के साथ मिलकर काम करना |
ब). अपराध प्रभावित व्यक्तियों एवं समुदायों के संरक्षण और संपोषण के लिए कार्य करना |
स). समाज में जन - सामान्य के सशक्तिकरण के लिए कार्य करना जिससे कि वे अन्याय एवं अपराधिक तत्वों के विरुद्ध खड़े हो सकें |    
४.    अ). सरकारी तंत्र एवं कॉर्पोरेट क्षेत्र  में भ्रष्टाचार को उजागर करना एवं उसे दूर करने के लिए प्रयास करना |
ब). सामान्य लोगों को भ्रष्टाचार विरोधी उपागमो जैसे की सूचना का अधिकार  के बारे में जानकारी एवं प्रशिक्षण देना |
स). सरकारी तंत्र व संस्थाओ की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कार्य करना |
द). सरकारी तंत्र में विभिन्न पदों पर कार्यरत व्यक्तियों की जवाबदेही बढाने के लिए कार्य करना |  
५.    अ). विकलांग लोगों के कल्याण  के लिए सरकार के साथ संयुक्त प्रयास करना |
ब). विकलांग लोगों के कल्याण  के लिए उपयुक्त अवसर  एवं साधन विकसित करना |
स). शारीरिक एवं मानसिक विकलांगता के शिकार लोगों के कौशल  संबर्धन एवं क्षमता निर्माण के लिए कार्य करना |
द). केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा  विकलांग लोगों के निहितार्थ जारी की गयी विभिन्न योजनाओ के बारे में जन सामान्य को जागरूक करने का प्रयास करना|
य). विकलांग अनुकूल नीतियों के क्रियान्वयन में सरकार की सहायता करना |
र). विकलांग सैनिको के कल्याण के लिए काम करना |
६.     अ ). सामान्य जनहितार्थ की सरकारी योजनाओ के क्रियान्वयन के स्तर को मापना |
 ब ). इन योजनाओ के क्रियान्वयन में किसी रूकावट य कमी को सरकार की निगाह में लाना |   
७.    जन स्वास्थ्य :
अ ). सभी क्षेत्रों में, विशेषकर ग्रामीण छेत्रों में, सामान्य सुलभ स्वास्थ्य सुबिधाओ को उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास करना |
ब ). शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मार्थ अस्पतालों  का सञ्चालन करना |
स ). लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के बारे में प्रेरित करना |
द ). लोगों को वीमारियों से बचाने के लिए, विभिन्न रोगों और उनके बारे में जानकारी देना |
य ). प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों जैसें कि योग, आयुर्वेद, सिद्धा को बढ़ावा देना  |
      पक्षपोषण :
अ ). शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने में, और उनके अधिकारों के लिए लड़ने के लिए  सामान्य लोगों की मदद करना |
ब ). लोगों के अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी के लिए जन जागरूकता  पैदा  करना, सामान्य लोगों की समस्याओं को जिला, राज्य एवं केंद्रीय स्तर पर उठाना तथा  मीडिया, अकादमिक विशेषज्ञों , उद्योगपति,  ब्यूरोक्रेसी के साथ संपर्क करके समस्या समाधान करने का प्रयास करना |
स). न्यास के उद्देश्यों से सम्बंधित विषयों पर जनहित याचिकाए दायर करना |     
८.    शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पीने योग्य दोष मुक्त पानी उपलब्ध कराने के लिए ठोस प्रयास करना ताकि लोग भारत के संविधान में प्रदत्त जीवन के लिए उनके मौलिक अधिकार का सही प्रयोग कर सकें |
९.      समुदाय सशक्तिकरण :
अ . जन सशक्तिकरण करना और लोगों को अस्पृश्यता , मदिरापान , नशाखोरी, नशीले पदार्थो की तस्करी , जातिगत भेदभाव ,एवं अन्धविश्वास जैसी सामाजिक बुराइयों  से  लड़ने में मदद करना |
ब . गरीबी  मिटाने के लिए संघर्षरत लोगों की मदद करना |
स . मानवीय विकास को बढ़ावा देना |
द . संसाधन प्रबंधन  द्वारा क्षमता निर्माण करना |
य. लोगों का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं अध्यात्मिक उत्थान करने में मदद करना  जिससे कि  वो एक सुरछित , गरिमापूर्ण एवं समृधि का जीवन जी सके |
१०.      महिला सशक्तिकरण :
अ.   मुख्यतः  कन्या  शिक्षा और प्रोढ़  शिक्षा द्वारा |
आ. महिलाओ के संबैधानिक और मानवीय अधिकारों के बारे में जागृति उत्पन्न करना | घरेलू  हिंसा, दहेज़ कुप्रथा, यौन शोषण और महिलाओ को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाली अन्य समाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ना |
इ.     ग्रामीण छेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूह बनाने में मदद करके घरेलू उद्योग एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देना |
ई.     मातृत्व मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए महिलाओ को  पोषण सम्बन्धी एवं प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी देना |
उ.    समुदाय आधारित दृष्टिकोण द्वारा  क्षमता निर्माण करना |
ऊ.   सामाजिक एवं राजनितिक क्षेत्रों में  नारी नेतृत्व को बढ़ावा देना |
  शिक्षा क्षेत्र :
अ.   मैनेजमेंट, मेडिकल , कानून , मानविकी , विज्ञानं एवं प्रौद्योगिकी  और अन्य कौशल विकास के क्षेत्र में उच्च शिक्षण संस्थानों का गठन, प्रबंधन एवं सञ्चालन करना |
आ. ऐसे प्राथमिक, माध्यमिक एवं उचतर माध्यमिक शिक्षण संस्थानों का गठन, एवं सञ्चालन करना जिससे नई पीढ़ी को  हमारी गौरवशाली परंपराओं एवं सभ्यता के अनुसार ढाला जा सके |
११.     .सांस्कृतिक संबर्धन :
अ.   समाज के विभिन्न वर्गों में सामाजिक समरसता , बंधुता , सामाजिक न्याय एवं भाईचारा बढाने के लिए विभिन्न सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को करना एवं करने में मदद करना |
आ. पश्चिमीकरण एवं वैश्वीकरण के प्रभाव से समाप्त होती देशज संस्कृतियों के वचाव और उत्थान के लिए काम करना |
इ.      हमारे राष्ट्रीय आदर्शो और उनके विचार और द्दर्शन  के प्रचार प्रसार के लिए लेक्चर, सेमिनार, कार्यशाला, कांफ्रेंस , प्रदर्शन आदि का आयोजन करना |
ई.     समसामयिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर संलाप के स्तर को ऊँचा उठाना|
उ.    ट्रस्ट के उद्देश्य से सम्बंधित विषयों पर टीबी सीरियल , वृत्तचित्र,और फिल्म निर्माण करना और करने में सहयोग देना |
१२.      पर्यावरण संरक्षण  :
अ.   पर्यावरणीय प्रदूषण और पारिस्थितिक असंतुलन के बढ़ते कुप्रभाव के बारे में समाज में जागरूकता फैलाना |
आ. भारतीय सभ्यता के मूल्यों में निहित धारणीय विकास की अवधारणा को उजागर करना व बढ़ावा देना जिससे कि लोग पर्यावरण संरक्षण के भारतीय तरीकों को अपनाये |
इ.      पर्यावरण शिक्षा , पर्यावरण नीति निर्धारण एवं कानून निर्माण में एक थिंक टैंक के रूप कार्य करना |
ई.     नदियों , झीलों और तालाबों को मानव जनित  प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए कार्य करना |
उ.    वनीकरण और जंगलों एवं पारिस्थितिकी हॉट स्पॉट के संरक्षण के लिए काम करना |
१३.     आपदा राहत:
अ.   प्राकृतिक अपदाओ जैसे कि भुखमरी , भूकंप , बाढ़ , आग , महामारी तथा अन्य समस्याओ से प्रभावित लोगों को भोजन, प्राथमिक चिकित्सा, आवास उपलब्ध कराना और इस कार्य में लगी हुई अन्य संस्थाओ को सहायता प्रदान करना |
आ. गंगा और अन्य सहायक नदियों  की बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की आपदा प्रबंधन  में मद्दद करना |
१४.      स्कूल , कॉलेज एवं विश्वविद्यालय स्तर पर छात्रवृत्ति का गठन करना |
१५.     अवार्ड :
ट्रस्ट के उद्देश्यों से सम्बंधित कार्य क्षेत्रों में अवार्ड का गठन करना |
१६.     गौ संरक्षण :
अ.   अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित करना जो कि गौ प्रजाति  संरक्षण  के लिए काम करें |
आ. गौशालाओ का स्थापन  और रख्राकाव करना |
इ.     गौ वध के विरोध में जन जागरूकता फैलाना  और लोक मत का निर्माण करना|
१७.     भारतीय विदेश नीति के अनुसार भारतीय राजनयिक रिश्तो को मजबूत करने के लिए कांफ्रेंस, सम्मेलनों, सेमिनार आदि का आयोजन करना |
१८.     न्यास के उद्द्देश्यों से  प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप सम्बंधित ऐसे चैरिटेबल फंड स्थापना,  प्रबंधन और सञ्चालन करना या न्यास से सम्बंधित उदेश्यों पर आधारित किसी फण्ड में योगदान देना |
१९.      ट्रस्ट की गतिविधियों को भारत और विदेशों में सुचारू रूप से चलाने के लिए तथा स्वयं के न्यासी के माध्यम से ट्रस्ट के रूप में कार्य करने के लिए संपत्ति प्राप्त करना , धारण करना , प्रबंधन करना और कोष निर्माण करना |
२०.     ऐसे सभी अनुषांगिक कार्य करना  जो कि न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक हो |
IV. संस्थापक न्यासी :-
उपरोक्त वर्णित सभी न्यासी, न्यास के संस्थापक न्यासी होंगे और जीवन पर्यंत पद धारक होंगे |
वशर्ते कि निम्नलिखित दशाओ में एक व्यक्ति ट्रस्ट का न्यासी नहीं रह सकता :
(i)       यदि उसकी मृत्यु हो जाती है ; य
(ii)      यदि वह अमुक्त दिवालिया हो गया हो ; य
(iii)      यदि वह अपनी स्वेक्छा अनुसार  न्यास धारिता से  ट्रस्ट अध्यक्ष को  लिखित त्यागपत्र देता है |
(iv)      यदि उसे न्यास विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण य नैतिक पतन के किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने पर, न्यास धारिता से हटाया जाता है|
स्पस्टीकरण १ : ट्रस्ट विरोधी गतिविधियों का मतलब ऐसी गतिविधियों से है जो ट्रस्ट के उद्देश्य के मुताविक ट्रस्ट के कार्यप्रणाली में बाधा डालें |
स्पस्टीकरण २ : हटाने की प्रक्रिया:
न्यासियों का बोर्ड, उस समय के न्यासियो के सामान्य बहुमत से, किसी भी न्यासी को, स्थायी य अस्थायी, न्यास्धारिता से बाहर निकाल सकता हैं यदि वह न्यास की संपत्ति य न्यास के कार्यकलाप से सम्बंधित गंभीर दुराचार में लिप्त पाया जाता है य नैतिक पतन के किसी अपराध का दोषी पाया जाता है | वशर्ते न्यासियों का बोर्ड, स्पस्ट निष्कर्ष के बाद लिखित कारणों से  ऐसे किसी न्यासी को न्यास में बनाये रख सकता है जब उस न्यासी का न्यास के उद्देश्यों के लिए न्यास में होना अति आवश्यक हो | वशर्ते कि उस न्यासी की, उसके ऊपर लगे हुए आरोपों पर विना उसका पूरा पक्ष सुने हुए , दोषिता का कोई भी निष्कर्ष नहीं निकाला जायेगा | इस सम्बन्ध में न्यासियों के बोर्ड  का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा |
वशर्ते कि इस तरीके से उत्पन्न कोई भी पदों की रिक्तता, शेष बचे हुए न्यासियों के बहुमत से नए न्यासी /न्यासियों  के नियुक्ति से भरी जाएगी |
V. न्यासियों का बोर्ड/मंडल :
न्यास का प्रशाशन न्यासियों के बोर्ड द्वारा, जिसमे कम से कम ३ और अधिकाधिक ११ सदस्य होंगे, द्वारा किया जायेगा |  
VI. सहयोजन :
न्यासियों का बोर्ड अधिकतम १०० अतिरिक्त सदस्यों  को न्यासियों के रूप में सहयोजन कर सकता है जिनके कार्यकाल की अवधि एक साल की होगी और जिसे न्यासियों का बोर्ड के बहुमत से और बढाया जा सकता है |
बशर्ते कि इन अतिरिक्त सदस्यों को “अतिरिक्त न्यासी ” कहा जायेगा और इनको न्यास के मामलों के प्रबंधन में मतदान देने का अधिकार नहीं होगा |
बशर्ते कि एक  “अतिरिक्त न्यासी ” पूर्ण न्यासी होने के लिए उत्तीर्ण हो सकता है जब वर्तमान न्यासी , लगातार दो वर्ष तक उस अतिरिक्त न्यासी का न्यास के लिए योगदान/ रचनात्मक जुडाव देखकर , उसे न्यास में शामिल करने के लिए सहमत हो जाये |
वशर्ते कि :
ऐसा कोई भी व्यक्ति जो
(i)           एक अमुक्त दिवालिया हो; य
(ii)          नैतिक पतन पर आधारित आरोप के लिए  औपचारिक रूप से दोषरोपित हो चूका हो |
(iii)        पागल हो ;
(iv)        नाबालिग हो ;
  अतिरिक्त न्यासी बनने के योग्य नहीं होगा |
VII. बोर्ड का गठन :
(i)         न्यासी अपने मध्य से अध्यक्ष , उपाध्यक्ष , सचिव व कोशाध्यक्ष का चुनाव करेंगे जो की न्यासियों का बोर्ड कहलायेगा, जिनके कार्यकाल की अवधि दो वर्षो य जब तक नए पदाधिकारी नियुक्त नहीं होते, की होगी |
(ii)       पदाधिकारियों के चुनाव के लिए , बैठक का आवाहन न्यासियों द्वारा नियुक्त चुनाव समिति य वरिष्ठतम न्यासी के द्वारा उस समय जो भी सुबिधाजनक हो के द्वारा किया जायेगा |
(iii)     चुनाव की इस बैठक का कोरम/गणपूर्ति शत प्रतिशत होगी |
(iv)    पदाधिकारियों का चुनाव नई अवधि के लिया किया जा सकता है |
(v)     कोई भी न्यासी एक समय में दो पदों पर साथ साथ नहीं रह सकता है |
(vi)    जिन पदों पर रिक्तता होती है उनको चुनाव के द्वारा भरा जाएगा |  
VIII. न्यासियों के बोर्ड की बैठक :
न्यासियों के बोर्ड की बैठक प्रत्येक तिमाही में कम से कम एक बार होगी और जरूरत पड़ने पर एक से जायदा बार भी हो सकती है |
(i)           न्यासियों के बोर्ड की बैठक ट्रस्ट के अध्यक्ष की सहमती से , ट्रस्ट के सचिव द्वारा बुलायी जाएगी |
(ii)          बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष द्वारा की जाएगी |अपनी अनुपस्थिति में अध्यक्ष , उपाध्यक्ष को बैठक की अध्यक्षता करने के लिए मनोनीत कार सकता है | यदि किसी समय अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों बैठक में अनुपस्थित हैं तो बैठक में मौजूद सभी न्यासी अपने में से किसी एक को उस बैठक की अध्यक्षता करने के लिए चुन सकते हैं |
(iii)        न्यासियों के बोर्ड की बैठक के लिए कोरम की संख्या कम से कम तीन य  न्यासियों के बोर्ड की संख्या का आधा, होगी | यदि जरूरी कोरम की पूर्ति नहीं है तो बैठक को बैठक को अध्यक्ष और सचिव के सहमती से उस समय , तारीख और जगह के लिए टाल दिया जायेगा जब  यह बैठक पूर्ण की जा सके और बैठक के मुद्दे पर विचार किया जा सके | इस तरह से  हुई  बैठक में कोई भी नया मुदा नहीं लिया जायेगा |
(iv)        बैठक में सभी निर्णय बहुमान से लिए जायेगें और बराबरी की दशा में बैठक का अध्यक्ष अपने निर्णायक मत का प्रयोग  करेगा |
(v)         परिसंचरण द्वारा न्यासियों की सर्व सम्मति से पारित किसी प्रस्ताव उसी तरीके से प्रभावी होगा जैसे की वह न्यासियों के बोर्ड की बैठक में पास किया गया हो | यदि कोई न्यासी, प्रस्ताव के खिलाफ,  प्रस्ताव में दिए गए समय के अन्दर अपना प्रतिरोध  व्यक्त नहीं कर्ता तो यह उसकी सहमती मानी जाएगी|
(vi)        बोर्ड की बैठक के लिए कम से कम एक सप्ताह की अग्रिम नोटिस, जिसमे बैठक का दिन, समय, जगह और बैठक का अजेंडा तय होगा, दी जाएगी जब तक न्यासियों द्वारा कम समय की नोटिस के लिए सहमती हो जाती है |
(vii)      न्यासियों का बोर्ड, बैठक में ऐसे लोगों को भी आमंत्रित कर सकता है जो न्यास के क्रियाकलापों और उद्देश्यों से सरोकार रखते हैं यद्यपि उन्हें मत डालने का अधिकार नहीं होगा |
(viii)     बैठक की कार्यवाही :
बैठक के अध्यक्ष की अनुमति के बिना , न्यासियों के बोर्ड की बैठक में ऐसे किसी बात पर चर्चा नहीं होगी जो अजेंडा में नहीं है |
(ix)        ऐसा न्यासी जो बैठक में उपस्थित नहीं हो सकता, वह अपना मत लिखित में भेज सकता है और उस विषय पर उसे उस न्यासी का वोट माना जायेगा|
(x)         न्यासियों के बोर्ड की बैठक की कार्यवाही के कार्यवृत्त एक अलग  नोटबुक में लिखी जाएगी  जो की बैठक के अध्यक्ष द्वारा हस्ताक्षरित होगी | और यह नोटबुक बैठक में की गयी कार्यवाही का मान्य साक्ष्य होगा |
IX . न्यास के पद धारियो की शक्तियां
१.    अध्यक्ष :
(i)           न्यास का अध्यक्ष न्यास की सभी जनरल बॉडी मीटिंग्स की अध्यक्षता करेगा |
(ii)          अध्यक्ष न्यास के अन्य पद धारियों को न्यास द्वारा लिए गए निर्णयों को क्रियान्वित करने के लिए आदेशित कर सकता है |
(iii)        असामान्य परिस्थितियों में,न्यास का अध्यक्ष न्यास के उद्देश्य और हित में  स्वयं कदम उठा सकता है |
(iv)        अध्यक्ष के अग्रिम सहमती के बिना, कोशाध्यक्ष किसी धनराशी को आहरित नहीं कार सकता |
(v)         अध्यक्ष , न्यास की बैठकों के लिए एजेंडा तय कार सकता है |
२.    उपाध्यक्ष :
३.    न्यास के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में , अध्यक्ष के कार्यों का निर्वहन उपाध्यक्ष करेगा  और अध्यख द्वारा प्रदत्त सभी शक्ति और अधिकार  का प्रयोग करेगा |
४.    सचिव:
(i)           न्यास का सचिव न्यास द्वारा लिए गए सभी निर्णयों को क्रियान्वित करने और उनका रिकॉर्ड रखने के लिए जिम्मेदार होगा |
(ii)          न्यास के सदस्यों , सरकार य अन्य किसी संस्था से न्यास के की ओर से  पत्र - व्यवहार रखने की जिम्मेदारी सचिव पर होगी |
(iii)        अध्यक्ष की सहमती से, सचिव न्यास की बैठकें आमंत्रित करेगा |
(iv)        न्यास की वार्षिक रिपोर्ट को तैयार करने और जमा करने की जिम्मेदारी सचिव की होगी |
(v)         ट्रस्ट की सदस्यता की लिस्ट बनाने और अद्यतन करने की जिम्मेदारी सचिव की होगी |
५.    कोशाध्यक्ष :
(i)       कोशाध्यक्ष न्यास के धन का प्रभारी होगा और केवल कोशाध्यक्ष ही अध्यक्ष के साथ बैंक अकाउंट का सञ्चालन करेगा |
(ii)      न्यास के नियमों और अध्यक्ष के निर्देशों के अनुसार , कोशाध्यक्ष न्यास के लिए धन लेने और देने का अधिकार रखता है |
(iii)     कोशाध्यक्ष लेखा-विवरण बनाएगा और न्यासियों द्वारा बताये गए व्यक्ति से लेखा परीक्षा करवाएगा और वार्षिक रूप,से न्यासियों के बोर्ड के सामने अनुमोदन के लिए रखेगा |
(iv)    कोशाध्यक्ष न्यास के लिए चंदा ग्रहण  कर सकता है और उनकी रशीद जारी कर सकता है |

६.    न्यास का settler अपने जीवन पर्यंत न्यास का मुख्य संरक्षक रहेगा और न्यासियों को न्यास के उद्देश्य के क्रियान्वयन के लिए निर्देशित कर सकता है |
७.    न्यास का मुख्य संरक्षक होने के नाते settler केवल असामान्य परिस्थितियों में न्यास के उद्देश्यों  के परम  हित में, न्यास के क्रिया कलाप में हस्तक्षेप  कर सकता है |
X. न्यास का कोष :
न्यास के कोष में निम्नलिखित शामिल होगा  :
(i)       लोकोपकारको से प्राप्त हुआ धन |
(ii)      न्यास के लिए निधि
(iii)     केंद्र और राज्य सरकारों, निगमो, सांविधिक निकायो और संस्थाओ से प्राप्त सहायता राशि |
(iv)    न्यास की संपत्ति  से आमदनी |
(v)     सामान्य जनता और संस्थाओ से प्राप्त धन
(vi)    न्यास के द्वारा नियंत्रण किसी संस्था से प्राप्त अन्य कोई आमदनी |
(vii)   भारत और विदेश के लोगों, कंपनियों, संस्थाओ और प्रतिष्ठानों से प्राप्त धन और उपहार |
(viii) निवेश उपधारा :
न्यास के कोष का धन इनकम टैक्स एक्ट की धारा १३(१) (d) और ११(५ ) के अनुसार निवेश किया जायेगा |
(ix)    यदि किसी वर्ष में न्यास की धन राशि का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता है तो बची हुई आमदनी इनकम टैक्स अधिनियम के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अगले वर्ष के लिए स्थानांतरित कार उस वर्ष में न्यास के उद्देश्यों पर खर्चा किया जायेगा |
(x)     न्यास का कोष और आमदनी न्यास के उद्देश्यों की पूर्ती के लिए ही उपयोग में लाया जायेगा और उसका कोई भी भाग न्यासियों को लाभ , ब्याज य dividend के रूप में नहीं दिया जायेगा |
XI. न्यासी को समय समय पर नियम बनाने  की शक्ति होगी |
(i)       न्यास की बैठक और कार्यवाही के लिए
(ii)      न्यास के उद्देश्यों के क्रियान्वयन के लिए
(iii)     न्यास द्वारा संचालित संस्थाओ में उप–समिति, सलाहकारी एवं प्रशासकीय समितियों को नियुक्त करना और उनकी शक्तियों को किसी अन्य ब्यक्ति य संस्था में निहित करना |
(iv)    जरूरी स्टाफ को नियुक्त करना और उनके खिलाफ जरूरी अनुशासनात्मक कार्रवाई करना  जैसे की उनकी सेवा शर्तों को विनियमित करना और उनकी सेवा समाप्त करना |
(v)     न्यास के उद्देश्यों के लिए किसी अन्य मुद्दे पर भी |
XII. न्यासियों के बोर्ड को अधिकार है कि:
न्यास के प्रबंधन और प्रशासन के लिए न्यासियों की अन्य सामान्य शक्तियों  को प्रभावित किये बिना , न्यासियों के बोर्ड के पास निम्नलिखित शक्तियां होगी :
(i)           न्यास के नाम पर चल और अचल संपत्ति खरीदना ,उपहार में प्राप्त करना य लीज पर लेना और उसे बेचना , गिरवी रखना, लीज पर देना बशर्ते कि संपत्ति खरीदने य बेचने  के लिए न्यासियो के बहुमत की सहमती आवश्यक है |
(ii)          किसी अनुसूचित बैंक में खाता खोलना और उसका सञ्चालन कोषाध्यक्ष द्वारा, अध्यक्ष य सचिव की देखरेख में करना |
(iii)        न्यास की संपत्ति पर ऋणपत्र जारी कर के कोष इकट्ठा करना और उसके पुनः भुगतान के लिए प्रावधान करना वशर्ते कि कोई भी न्यासी ब्याक्तिगत रूप से उत्तरदायी नहीं होगा |
(iv)        जरूरत के समय न्यास के हित में और न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु , न्यास की संपत्ति को संरक्षित कर लोन लेना  वशर्ते कि सभी न्यासी इस बात के लिए एकमत से निर्णय लें |
(v)         न्यासियों के बोर्ड द्वारा नामित किन्ही दो न्यासियों को प्राधिकृत करना ताकि वे कोई कॉन्ट्रैक्ट , दस्तावेज़  य अन्य कोई पेपर पर हस्तक्षर कार सके |
(vi)        न्यास के विकास के लिए कोष सृजित करना और दान ग्रहण करना |
(vii)      न्यास के नाम पर किसी भवन का निर्माण करना repair करना |
(viii)     न्यास के प्रशाशन के लिए उपयुक्त स्टाफ को नियुक्त करना , निलंबितऔर बर्खास्त  करना, और उनके बेतन और अन्य लाभ के लिए नियम बनाना |
(ix)         किसी विवाद का समाधान सहमती , समझौता द्वारा करना और उसे मध्यस्थता के लिए भेजना |
(x)         न्यासियों का बोर्ड न्यास के नाम पर वादी और प्रतिवादी बन सकता है |
(xi)        कोई भी न्यासी , न्यास की संपत्ति और कोष से सम्बंधित विश्वास भंग  य धोखाधड़ी नहीं करेगा |
(xii)      न्यासियों को यह शक्ति प्रदान है की वे कोई भी परोपकार कार्य किसी भी समय शुरू कार सकते हैं और बंद भी कर सकते है य न्यास की संपत्ति य धन का कोई भाग इस कार्य के लिए अलग कार सकते हैं |
XIII. लेखा :
न्यासी  सभी प्राप्ति और भुगतान का और न्यास की संपत्ति का सही लेखा जोखा रखेगे| न्यास के लेखा ब्यौरा का वार्षिक परिक्षण न्यासियो के बोर्ड द्वारा नियुक्त एक उपयुक्त लेखापाल से करवाया जायेगा | प्रत्येक उत्तरवर्ती वर्ष के लिए लेखांकन वर्ष १ अप्रैल से ३१ मार्च  होगा |
XIV. न्यास के क्रियाकलाप का कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारत वर्ष होगा |
XV. न्यास अखण्डनीय होगा |
XVI. विघटन:
न्यास के विघटन य समापन होने की दशा में , न्यास के सभी कोष इकठ्ठा किये जायेंगे और सबसे पहले न्यास की सभी देनदारियों को चुकता करने में प्रयोग में लाया जायेगा | समापन के समय जो भी संपत्ति न्यास के नाम पर रहेगी उसे किसी भी दशा में न्यासियों य उनके रिश्तेदारों में बांटा नहीं जायेगा बल्कि किसी धार्निक न्यास य संस्था को जिसके उद्देश्य न्यास के उद्देश्यों से मेल खाते हों और जो धारा ८० जी के तहत मान्य हो , य प्रधानमंत्री राहत कोष को हस्तांतरित कर दिया जायेगा
XVII. हानिरक्षा:
सभी न्यासी , न्यास द्वारा दी गयी शक्तियों का निर्वहन करते हुए नेक नीयत से किसी भी काम को करते हुए, किसी नुकसान य देनदारी के लिए क्षतिपूरित होंगे   |
XVIII. न्यासियों की सहमति :
सभी पक्ष यह घोषित करते हैं कि उन्होंने न्यासी की तरह काम करने के लिए , जैसा की उपरोक्त वर्णित है , सहमती दे दी है  और अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं|
XIX. संशोधन:
न्यास पत्र , नियमो और अधिनियमों में ऐसा कोई संशोधन नहीं  किया जायेगा हो की इनकम टैक्स एक्ट की धारा २(१५ ), ११, १२, , ८० जी के बिरुध हो | और कोई भी संसोधन बिना इनकम टैक्स कमिश्नर की अनुमति के बिना नहीं किया जायेगा |  


  



      


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